रिपोर्ट:मनव्वर कुरैशी
रुड़की।रमजान के पवित्र महीने में मुसलमानों के लिए सुबह (सहरी) से शाम (इफ्तार) तक बिना कुछ खाए-पिए रोजा रखना अनिवार्य है। इस दौरान झूठ, लड़ाई-झगड़े और अनैतिक कार्यों से बचना, नमाज पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, दान (जकात-सदका) देना और गरीबों की मदद करना प्रमुख धार्मिक आदेश हैं।
मुस्लिम कम्युनिटी में रमजान का महीना सबसे पाक यानी पवित्र माना जाता है। रमजान के महीने में लोग आत्म चिंतन करते हैं और इस दौरान प्रातः से सांय तक रोजा रखना इबादत करना गरीबों की सेवा करना एक तरह से इस त्योहार को आध्यात्मिक शुद्धि के रूप में देखा जाता हैं ईद-उल-फितर (मीठी ईद) रमजान के पवित्र महीने में पूरे एक महीने के रोजे, इबादत और अनुशासन के समापन के रूप में मनाई जाती है। यह अल्लाह के प्रति आभार (शुक्र) प्रकट करने, भाईचारा बढ़ाने, और जरूरतमंदों की मदद (जकात) करने का दिन है। यह त्योहार ऐतिहासिक रूप से पैगंबर मुहम्मद के दौर में शुरू हुआ था।
रमजान का जश्न: यह त्योहार रमजान के पवित्र महीने के खत्म होने की खुशी में मनाया जाता है, जहां मुसलमान उपवास (रोजा) और आत्म-चिंतन करते हैं।
अल्लाह का शुक्र: यह दिन अल्लाह को धन्यवाद देने का दिन है कि उन्होंने महीने भर रोजा रखने की शक्ति दी।
सामाजिक एकता और भाईचारा: ईदगाह में सामूहिक नमाज़ और गले मिलकर, अमीर-गरीब सब मिलकर प्यार और समानता का संदेश देते हैं।
दान (जकात-उल-फितर): ईद की नमाज से पहले जरूरतमंदों को दान दिया जाता है ताकि वे भी ईद मना सकें।
इसे ‘मीठी ईद’ इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन घरों में विशेष रूप से मीठे व्यंजन (जैसे- सेवइयां) बनाए जाते हैं।
रमजान के महीने का आखिरी हफ्ता शुरू हो चुका है और इसी के साथ हर जगह ईद को लेकर उत्साह भी शुरु हो चुका है। ईद की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरु हो जाती हैं। रमजान खत्म होते ही ईद उल-फितर मनाई जाती है और लोग अपनों के साथ मिलकर लजीज खाने और मिठाइयों का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं। इस दौरान सेंटर ऑफ अट्रैक्शन सेवइयां और शीर खुरमा होती है। इस त्योहार में इतनी मिठाइयां होती है और इसी वजह से लोग इसे मीठी ईद भी कहते हैं। इस खास दिन लोग अपनों से मिलने जाते हैं और गले लगकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं।
भारत में कब मनाई जाएगी ईद?
एस्ट्रोनॉमिक सेंटर की ओर से बताया जा रहा है कि जिन देशों में लोगों ने 19 फरवरी से रोजा रखना शुरु किया था, वहीं पर 20 मार्च को ईद का जश्न मनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उम्मीद है कि भारत में नया चांद 19 मार्च को दिख जाएगा। अगर 19 मार्च को नया चांद दिख जाए तो अगले दिन यानी 20 मार्च को ईद मनाई जा सकती है। अगर नया चांद 19 को नहीं दिखेगा तो यही माना जाएगा कि ईद 21 मार्च को है।
रमजान के महीने का आखिरी हफ्ता शुरू हो चुका है और इसी के साथ हर जगह ईद को लेकर उत्साह भी शुरु हो चुका है। ईद की तैयारियां कई दिन पहले से ही शुरु हो जाती हैं। रमजान खत्म होते ही ईद उल-फितर मनाई जाती है और लोग अपनों के साथ मिलकर लजीज खाने और मिठाइयों का आनंद लेते हैं और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं। इस दौरान सेंटर ऑफ अट्रैक्शन सेवइयां और शीर खुरमा होती है। इस त्योहार में इतनी मिठाइयां होती है और इसी वजह से लोग इसे मीठी ईद भी कहते हैं। इस खास दिन लोग अपनों से मिलने जाते हैं और गले लगकर इस त्योहार का जश्न मनाते हैं।
रमजान का महीना का आखिरी रोजा कल शुक्रवार को है और नया चांद देखने के बाद मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद उल फित्र का त्योहार मनाया जाता है. रमजान के 30 रोजे रखने के बाद ईद का जश्न मनाया जाता है. इस बार ईद का चांद का 20 मार्च को दिखाई देने की संभावना है और 21 मार्च यानी शनिवार को देशभर त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन लोग सेंवियां, शीर-खुरमा, खीर जैसी पकवान बनाते हैं और सभी लोग एक दूसरे की दावत करते हैं. ईद के त्यौहार पर प्रत्येक मुसलमान को जकात जिस पर फर्ज है अदा की जाती है एवं जरूरतमंद यतीम में वितरित की जाती है ईद के इस अवसर पर शीर सद्भाव शांति के इस त्यौहार को खुशी से पूरे भारतवर्ष और विश्व में मनाया जाता है ईद से पहले चांद रात की खुशी में बाजार रातभर गुलजार रहते है!

*राइटर:-जुनैद गौड*

error: Content is protected !!