हरिद्वार में आगामी कुंभ मेले की तैयारियों के बीच शहर के पुराने पुलों और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कुंभ के लिए जारी होने वाले बजट की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र निगरानी समिति के गठन और जर्जर पुलों पर भारी वाहनों की आवाजाही तत्काल रोकने की मांग की है। वहीं, कुंभ मेला प्रशासन का कहना है कि सभी संवेदनशील स्थलों का सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है और ऑडिट में मिली सिफारिशों के अनुसार सुरक्षा व मरम्मत के कार्य लगातार कराए जा रहे हैं।

अरविंद श्रीवास्तव अधिवक्ता का कहना है कि हरिद्वार में प्रत्येक 6 वर्ष बाद अर्धकुंभ और 12 वर्ष बाद महाकुंभ का आयोजन होता है, जिसके लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से हजारों करोड़ रुपये का बजट जारी किया जाता है। उनका आरोप है कि इस बजट के दुरुपयोग और संभावित घोटालों को रोकने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया जाना चाहिए, जो खर्च पर नजर रखे और किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट सीधे केंद्र सरकार को भेजे। उन्होंने कहा कि हर कुंभ में अस्थायी पुलों के निर्माण पर भारी धनराशि खर्च की जाती है, जबकि इसी बजट से स्थायी और गुणवत्तापूर्ण पुल बनाए जाएं तो भविष्य में बार-बार होने वाले खर्च से बचा जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि हरिद्वार के कई पुराने पुल अपनी आयु पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन पर अब भी भारी वाहनों और स्कूल बसों का संचालन हो रहा है, जिससे आम जनता की जान को खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे पुलों पर तत्काल भारी वाहनों की आवाजाही रोकने की मांग की।

सोनिका, कुंभ मेला अधिकारी हरिद्वार ने बताया कि सभी संवेदनशील स्थलों का सेफ्टी ऑडिट कराया जा रहा है और ऑडिट में मिली सिफारिशों पर भी अमल किया जा रहा है। प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी जाती है तथा कई क्षेत्रों को ज़ीरो ज़ोन घोषित कर नियंत्रित तरीके से आवाजाही कराई जाती है। संबंधित विभागों से लगातार समन्वय कर उन्हें उनके अधीन आने वाले पुलों और अन्य संरचनाओं में आवश्यक मरम्मत व सुरक्षा संबंधी कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

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