रिपोर्ट : मनव्वर कुरैशी
पिरान कलियर।कोतवाल साहब की निगरानी में होगा उर्स का आयोजन,पास जारी न होने से दरगाहों से जुड़े मुख्य लोगों में नाराजगी उर्स के आयोजन को लेकर इस बार प्रशासन की व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि मेले में आने वाले खानकाहों के सूफी संतों और विभिन्न दरगाहों के सज्जादानशीनों को इस बार मेला पास जारी नहीं किए गए हैं। कई कई सौ किलो मीटर का सफर तय कर अकीदत मंद कलियर शरीफ दरगाह साबिर पाक के सालाना उर्स में पहुंचकर गाड़ियों से अपनी अपनी खानकाओ में लंगर (भंडारे) चलाने के लिए गाड़ियों से खाद्य सामग्री लेकर पहुंचते है लेकिन इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि कोतवाल साहब किसी जनप्रतिनिधि या गणमान्य लोगों का सुझाव मानने को तैयार नहीं है और पूर्व के उर्स की तरह से हटकर अपनी मनमर्जी से उर्स सम्पन्न कराना चाहते है सूफी संत उर्स का मुख्य स्तंभ है इस बार इग्नोर किया जा रहा है न जाने प्रशासन उर्स को कहा और कैसे सूफी संतों को इग्नोर करके उर्स सम्पन्न कराना चाहता है इसके चलते दरगाहों से जुड़े लोगों और अकीदतमंदों में रोष व्याप्त है।और जहाँ नाको पर गाड़ियों का प्रवेश वर्जित रहेगा न वहां प्रशासन की ओर से कोई फोर व्हीलर पार्किंग की व्यवस्था है दूर दराज से आने वाले जायरीनों को लेकर इस बार बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और अव्यवस्था होने का भी अंदेशा है।स्थानीय लोगों का कहना है कि उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सूफी परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में खानकाहों और दरगाहों से जुड़े प्रमुख लोगों को मेले में प्रवेश के लिए पास नहीं मिलना लोगों को समझ से परे लग रहा है। अकीदतमंदों का कहना है कि वर्षों से उर्स के दौरान सूफी संतों, सज्जादानशीनों और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी आयोजन की महत्वपूर्ण परंपरा रही है।
वहीं, चर्चा है कि इस बार उर्स की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कोतवाल साहब की निगरानी में रहेगी। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, पास जारी नहीं किए जाने को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं और संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
अकीदतमंदों का कहना है कि उर्स में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं और खानकाहों तथा दरगाहों से जुड़े सूफी संतों एवं सज्जादानशीनों की मौजूदगी उनके लिए विशेष महत्व रखती है। ऐसे में यदि उन्हें मेला पास नहीं दिया गया है तो इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की समीक्षा कर खानकाहों के सूफी संतों और दरगाहों के सज्जादानशीनों के लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि उर्स की धार्मिक परंपरा और आपसी सौहार्द की भावना बनी रहे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस नाराजगी को किस तरह दूर करता है और उर्स के दौरान सभी अकीदतमंदों एवं धार्मिक प्रतिनिधियों के लिए क्या व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।

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