रिपोर्ट : मनव्वर कुरैशी
पिरान कलियर। हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाले 10 मोहर्रम (यौमे आशूरा) के अवसर पर पिरान कलियर में ताजियों और अखाड़ों के जुलूस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र से अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। जुलूस के दौरान नौहाख्वानी और पारंपरिक अखाड़ों के हैरतअंगेज करतब आकर्षण का केंद्र रहें।
मोहर्रम इस्लामी इतिहास की उस महान कुर्बानी की याद दिलाता है, जब कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ सत्य, इंसाफ और मानवता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। उनकी शहादत आज भी पूरी दुनिया को अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े रहने और इंसानियत की राह पर चलने का संदेश देती है।
पिरान कलियर में 10 मोहर्रम के मौके पर विभिन्न मोहल्लों से ताजिए पूरे सम्मान और अकीदत के साथ निकाले गए। जुलूस में शामिल अकीदतमंद ने शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।इसके साथ ही विभिन्न अखाड़ों के सदस्य पारंपरिक युद्धक कलाओं और करतबों का प्रदर्शन किया, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।
जुलूस के निर्धारित मार्गों पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन एवं पुलिस ने व्यापक तैयारियां की हुई थी। अधिकारियों ने आयोजन समितियों के साथ बैठक कर शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण ढंग से कार्यक्रम संपन्न कराने की अपील भी की थी।
नगर और आसपास के क्षेत्रों में भी मोहर्रम को लेकर विशेष तैयारियां की गई थी। सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने लोगों से आपसी भाईचारे, अमन और कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए मोहर्रम मनाने की अपील की थी।10 मोहर्रम का यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और मानवता के लिए दी गई महान कुर्बानी की याद को जीवित रखने का अवसर भी है। पिरान कलियर में हर वर्ष की तरह इस बार भी यह आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की गई। अकीदतमंदों ने जगह जगह खाना शरबत की शबील लगाकर व बड़े स्तर पर लंगर का आयोजन किया। इस अवसर पर पिरान कलियर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक एवं सी ओ दिव्येश उपाध्याय पुलिस बल के साथ मुस्तैद रहे।
