रुड़की में बिजली विभाग की नीतियों के खिलाफ किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। स्मार्ट मीटर,रोस्टिंग और रात की छापेमारी से परेशान किसानों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय का घेराव कर जमकर प्रदर्शन किया और छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। रुड़की के अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल कार्यालय उस समय किसान आंदोलन का केंद्र बन गया जब भारतीय किसान यूनियन (रोड) के पदाधिकारी और सैकड़ों किसान बिजली समस्याओं को लेकर धरने पर बैठ गए। धरने का नेतृत्व कर रहे यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पदम सिंह रोड ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और बार-बार की जा रही बिजली छापेमारी से किसान मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। किसान नेता प्रदीप त्यागी ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोस्टिंग और रात के अंधेरे में छापेमारी से किसानों में भय का माहौल है। कई गांवों में बिजली की लाइनें खतरनाक रूप से नीचे लटक रही हैं जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर किसानों को ट्यूबवेल की बिजली मुफ्त दी जाए और घरेलू उपभोक्ताओं पर लगाई गई पेनल्टी को तत्काल हटाया जाए। किसानों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर कार्रवाई की मांग की।

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